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हमें अभिमान को छोड़कर भजन करना चाहिए।

हमारे परम आराध्य श्रील गुरु महाराज “नित्यलीला प्रविष्ट ओम विष्णुपाद 108 श्री श्रीमद भक्तिदयित माधव गोस्वामी महाराज” अकसर अपनी कथा में कहा करते थे कि हमें अभिमान को छोड़कर भजन करना चाहिए।

श्रील भक्तिविनोद ठाकुर जी ने भी अपने कीर्तन में लिखा है

“अभिमान शून्य होए लओ कृष्ण नाम, कृष्ण माता कृष्ण पिता कृष्ण धन प्राण।”

गुरु महाराज जी ने अपने पूरे जीवन में इसका आचरण करके भी दिखाया। भारत के अनेक प्रांतों में गुरु जी ने प्रचार किया, 17 मठों की स्थापना की, और पंजाब जैसे राज्य में मायावाद का खंडन करते हुए श्रीमन चैतन्य महाप्रभु की वाणी का प्रचार-प्रसार किया — किंतु सदा अभिमान-शून्य रहकर। उसी परंपरा में हमारे मठ के वर्तमान आचार्य, परम पूज्यपाद श्रील भक्ति विचार विष्णु गोस्वामी महाराज के आचरण में यह विशेष गुण पूर्ण रूप से झलकता है।

श्रील भक्तिदयित माधव गोस्वामी महाराज