एक रात श्रील भक्ति प्रमोद पुरी गोस्वामी महाराज ने स्वप्न में देखा कि अग्रद्वीप, श्रीगोड़मण्डल में श्रीमन्महाप्रभु के परिकर, कीर्त्तन करने में अति दक्ष श्रीगोविन्द घोष एवं उनके दो भ्राताओं श्रीवासुदेव घोष, श्रीमाधव घोष के द्वारा सेवित श्रीगोपीनाथजी श्रील महाराज के हाथ से बनी खीर खाना चाहते हैं।
उन्होंने स्वप्न में देखी श्रीगोपीनाथ की इच्छा को इतना अधिक गुरुत्व दिया कि प्रातः काल उन्होंने बिना किसी विलम्ब के अत्यधिक आग्रहपूर्वक मुझे तथा मेरे गुरुभ्राता श्रीभक्तिनिलय मङ्गल महाराज के साथ अन्य कुछेक भक्तों को अपने साथ लिया तथा श्रीभूपेन मित्र के सहयोग से चार रिक्शों की व्यवस्था करके श्रीअग्रद्वीप में पहुँचे तथा उन्होंने श्रीगोपीनाथ के लिये स्वयं खीर रन्धन कर भोग की समस्त व्यवस्था की। उन्हीं के आग्रह से मैंने भी प्रथम बार श्रीगोपीनाथ के दर्शन किये, उससे पूर्व मुझे उस स्थान अथवा श्रीगोपीनाथ के विषय में कोई जानकारी तक भी नहीं थी।
श्रील भक्ति विज्ञान भारती गोस्वामी महाराज जी द्वारा संकलित ग्रन्थ में प्रकाशित