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श्री चैतन्य गौङीय मठ "श्रीकृष्ण प्रेम ही जिनका साध्य है"

श्रीचैतन्य गौड़ीय मठ के वैष्णव श्री गौरांग महाप्रभु के प्रियतम श्रीरूप गोस्वामी तथा उनका आनुगत्य करने वाले श्रील भक्तिविनोद ठाकुर व श्रील भक्ति सिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद के आश्रय में रहकर एकान्त भाव से श्रीगौराङ्गदेव की एवं श्री राधा-कृष्ण की उपासना में नियोजित हैं। श्रीकृष्ण - प्रेम ही उनका साध्य है एवं वही उनका साधन है। अप्रीति या अभक्ति तो श्रीचैतन्य गौड़ीय मठ के सेवकों का साधन हो ही नहीं सकती। प्रीति - विरोधिनी चेष्टा का श्रीचैतन्य गौड़ीय मठादि में किंचित मात्र भी आदर नहीं है ।
           जिस साधन से साध्य की प्राप्ति की कोई निश्चितता नहीं है तथा जिस साधन से शीघ्र अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति की कोई सम्भावना ही नहीं है, मेरी समझ में तो नहीं आता कि ऐसा साधन केवल मात्र भीड़ इकट्ठा करवाने के अतिरिक्त और कुछ मंगल करवा पायेगा ।


श्रील भक्ति दयित माधव गोस्वामी महाराज 
संदर्भ  :  क्या मैंने कोई गलती की?