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मैं श्रीकृष्ण की संपत्ति हूं - ऐसा पूर्ण विश्वास होने पर महामंत्र का जप करना।

उत्साह नहीं होने पर कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में उन्नति नहीं कर सकता। जितना अधिक संभवपर हो, उतना अधिक समय आप उत्साह पूर्वक श्री भगवान् को पुकारने में व्यतीत करना। ' मैं प्रतिदिन इतनी संख्या माला जप करूंगा ' - ऐसा नियम बनाकर अपराध-शून्य होकर श्रीमाला के ऊपर महामंत्र का जप करना। 'मैं श्रीकृष्ण की संपत्ति हूं'- ऐसा पूर्ण विश्वास होने पर इस संपत्ति को अन्यों के इंद्रिय- तर्पण के लिए व्यय करने का उत्साह उत्पन्न नहीं होगा। श्रीकृष्ण की सेवा के निमित्त सदा नियुक्त रहने पर ही आपको आनंद और उत्साह का अनुभव होगा। श्रीकृष्ण अखिल- रसामृत- मूर्ति हैं । इसीलिए सभी रस- प्रार्थियों की प्रार्थना पूर्ण होगी।जिनका कोई विशेष जागतिक स्वार्थ नहीं होता, वे भगवान को अर्थात् उनके पूर्ण रसमय स्वरूप को पूर्णरूप में आस्वादन करने का सुयोग प्राप्त करते हैं।जो श्री भगवान् को जैसा रस प्रदान करेंगे, वे उसी प्रकार का रस श्री भगवान्  से प्राप्त करेंगे। भक्ति मार्ग में भगवान् को अपना सर्वस्व समर्पण करने का विधान हैं। अतः श्री भगवान् के सुख के लिए अपनी सुख सुविधा की अभिलाषा वाली समस्त प्रवृत्तियो की बलि देनी होगी। दुख, भय एवं शोक से छुटकारा प्राप्त करने के लिए क्षुद्र व्यक्तियों के समक्ष अपने काय मन तथा वचन का बलिदान करने से कोई लाभ नहीं हैं। हमारे काय-मन-वाक्य रूपी समस्त उपहार एकमात्र अनन्त , सर्वशक्तिमान, सच्चिदानंद श्रीकृष्ण के ही प्राप्य हैं। आप निश्चिंत होकर श्री भगवान को पुकारिए वे अवश्य ही आपके समस्त अनर्थों को संपूर्ण रूप से दूर करेंगे। 

श्रीगौरजन 
श्रीमद भक्तिदयित माधव महाराज